*** बेटियों को जन्म लेने दो। ***

एक सवाल है दुनिया से
बेटे से है प्यार तो बेटी से क्यों दुर्व्यवहार ?
एक ही कोख से जन्म लेते हैं।
एक ही पिता की संतान होते हैं।
एक ही माता के शरीर के अंश‌ होते हैं।

सवाल है मेरा उन लोगों से
करते है घृणा जो बेटियों से
किसी की बेटी से ही तुमने जन्म पाया है।
कहानी सुनाने वाली दादी नानी भी किसी की बेटी थीं।
तुम्हारे पिता को जन्म भी किसी की बेटी से ही मिला है।
कलाई में राखी भी बेटी से ही बंधती है।
तुम्हारे जीवन की स्वपन सुंदरी भी किसी की बेटी होती है।
बहू बनकर परिवार का वंश एक बेटी ही बढ़ाती है।

बेटे के जन्म पर जिस बहू की वाहवाही करते हैं।
बेटी के जन्म पे उसी की दुर्दशा कर देते हैं।
जब घर में जन्म बेटे का होता है, तो
मेरा खून है, पिता गर्व से कहता है।
तो फिर जन्म बेटी का होने पर,
मां को क्यूं दोष दिया जाता है?

जवाब चाहिए मुझे मेरे सवालों का
अनुसंधान हुआ विज्ञान में है,
गर्भ में पल रहा शिशु का लिंग,
लड़का होगा या होगी लड़की, निर्भर करता पुरुष पर है।
तो जन्म होने पर बेटी का, दोष क्यों आता मां पर है।

मां अपनी बेटी को देख नहीं पाती,
बच्ची को गोद में लेकर दुलार नहीं सकती,
बेटी को सीने से लगाकर दूध नहीं पिला पाती,
उसकी प्यारी सी मुस्कान देख भी नहीं सकती,
क्योंकि उसके सपनों को पहले ही दफना दिया,
जन्म लेने से पहले ही उसकी बेटी को मार दिया।

अरे, समाज के महानायकों,
खुद पे ज़रा नज़र डालो।
कैसे तुम दुनिया में आए हो?
कैसे तुम इतने बड़े हुए हो?
सोच पे अपनी ज़रा शर्म करो,
अभी भी वक्त है सुधर जाओ।
वरना अंजाम के लिए तैयार हो जाओ।
बिना किसी की बेटी के साथ के
अकेले तुम कुछ कर नहीं सकते,
परिवार का वंश बड़ा नहीं सकते,
दुनिया को अकेले चला नहीं सकते,
आखिरी समय में जीवन के,
रह जाओगे रोते अकेले,

कहते हैं, कन्यादान ही सबसे बड़ा दान है।
कन्यादान ही जीवन का सबसे बड़ा कर्म है।
परंतु जो पुरुष कन्या को ही पाप मानता है।
उनसे अनंत घृणा करता है, दोष मानता है।
कोई हक नहीं उसको कन्यादान स्वीकारने का।
कोई हक नहीं उसको कन्या से ब्याह रचाने का।
कोई हक नहीं है उसको मां का बेटा कहलाने का।

सवाल है मेरा इस दुनिया के लोगों से,
बेटे का है मान तो बेटी का क्यों करते हो अपमान?
यह लिंग भेद करना बंद करो,
ज़रा अपने नजरिए को बदलो,
बेटी को जन्म लेने दो,
उसको प्यार मोहब्बत दो।


       🌷****गुड़िया यादव****🌷

Comments