जल और धरती
बहुत बड़ी है पृथ्वी हमारी,
अमिट है गहराई नील सागर की,
दोनों की रक्षा करना है हमारी जिम्मेदारी,
दोनों ही जीवन का आधार है होती।
पेड़, पर्वत, पशु, पक्षी,
होते हैं श्रृंगार धरती की,
भिन्न प्रकार के जीव, वनस्पति,
बढ़ाते हैं शोभा समंदर की।
अस्तित्व है कुछ जीवों का जमीं पर,
तो कुछ का है पानी के अंदर,
कुछ जीव रहते हैं सदा जमीन पर।
मेंढक, मगरमच्छ, साप, घूमते हैं दोनों जगह पर।
जमी पर मनुष्य का होता राज,
समंदर में मछलियों का होता साम्राज्य,
जमीन पर करोड़ों प्रजातियां हैं होती
समंदर में खूबसूरत मछलियां है होती।
किंतु समय कुछ ऐसा है आया,
मनुष्य ने धरती को है सताया,
अपने कुछ स्वार्थ के खातिर,
जल को भी गंदा है किया।
जल में भी गंदगी है फैलाया।
**** गुड़िया यादव ****
Nice.. Keep writing.. Keep Improving
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